लेखनी कहानी -18-May-2025
मैं उसकी आदतों की शिकायात क्या करूं। मिलते नहीं है जिसके ख्यालात क्या करूं।
मिलता है जब भी मुझसे रहता खफा खफा। ऐसे में कोई प्यार की मै बात क्या करूं।
बेहिस है जो न समझे अहसास को मेरे। उसको मैं पेश दर्द के नग़्मात क्या करूं।
मैने खुशी के फूल का तोहफा जिसे दिया। बख्शा है उसने अश्क के सौगात क्या करूं।
सगीर अहमद सिद्दीकी खैरा बाजार बहराइच
Pranav kayande
17-Jan-2026 01:35 PM
Amazing
Reply